पाठ्यक्रम: जीएस-2/शासन, जीएस- 3/अर्थव्यवस्था
सन्दर्भ
- भारत सरकार ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के अंतर्गत नियमों में संशोधन करते हुए सीमित चीनी हिस्सेदारी वाली विदेशी कंपनियों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) मानदंडों को सरल बनाया है।
परिचय
- पूर्व व्यवस्था: उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के अनुसार, सीमावर्ती देशों से किसी भी स्तर के निवेश के लिए, भले ही हिस्सेदारी बहुत कम हो, पूर्व सरकारी स्वीकृति आवश्यक थी।
- संशोधित नीति: अब प्रतिबंध केवल उन मामलों में लागू होंगे जहाँ वास्तविक लाभकारी स्वामित्व महत्त्वपूर्ण हो, न कि न्यूनतम हिस्सेदारी पर।
- “लाभकारी स्वामी” की अवधारणा धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के अंतर्गत परिभाषित है, जिसके अनुसार वह व्यक्ति या संस्था जिसके पास किसी कंपनी में 10% से अधिक स्वामित्व, नियंत्रण या लाभ में अधिकार हो।
संशोधन के प्रमुख प्रावधान
- सीमित चीनी हिस्सेदारी के लिए स्वचालित मार्ग: जिन विदेशी कंपनियों में चीन या हांगकांग की हिस्सेदारी 10% तक है, उन्हें क्षेत्रीय शर्तों के अधीन भारत में स्वचालित मार्ग से निवेश की अनुमति दी गई है।
- यह परिवर्तन केवल उन क्षेत्रों पर लागू होगा जहाँ पहले से स्वचालित मार्ग के तहत निवेश की अनुमति है।
- सीमावर्ती देशों की संस्थाओं का अपवर्जन: यह छूट चीन, हांगकांग या भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले किसी भी देश में स्थापित संस्थाओं पर लागू नहीं होगी।
- ऐसी संस्थाओं को निवेश के लिए पूर्व सरकारी स्वीकृति लेना जारी रखना होगा।
- बहुपक्षीय संस्थानों के निवेश: जिन बहुपक्षीय संस्थानों में भारत सदस्य है, उनके निवेश को किसी विशेष देश का निवेश नहीं माना जाएगा।
- शिथिल श्रेणी में आने वाले निवेशों पर भी भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित रिपोर्टिंग आवश्यकताएँ लागू रहेंगी।
विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999
- विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 भारत सरकार द्वारा विदेशी मुद्रा लेन-देन को विनियमित करने तथा बाह्य व्यापार और भुगतान को सुगम बनाने के लिए बनाया गया कानून है।
- इसे विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973 के स्थान पर लागू किया गया।
- यह भारत में विदेशी मुद्रा प्रबंधन के लिए विधिक ढांचा प्रदान करता है, जिसमें प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, बाह्य ऋण और सीमा-पार भुगतान शामिल हैं।
- भारतीय रिज़र्व बैंक इस अधिनियम के प्रावधानों के क्रियान्वयन और विनियमन के लिए प्रमुख प्राधिकरण है।
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्रवाह की हाल की प्रवृत्तियाँ
- कुल निवेश में वृद्धि: अप्रैल–फरवरी 2025–26 के दौरान कुल निवेश प्रवाह (पुनर्निवेशित आय सहित) बढ़कर 88.29 अरब डॉलर हो गया है।
- निवेश सुविधा: “इन्वेस्ट इंडिया” ने 2025–26 में 6.1 अरब डॉलर से अधिक मूल्य की 60 परियोजनाओं को जमीन पर उतारने में सहायता की।
- प्रमुख निवेश स्रोत: कुल निवेश मूल्य का लगभग 42% यूरोपीय देशों से आता है, जो विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ मजबूत जुड़ाव को दर्शाता है।
- शीर्ष स्रोत देश: सिंगापुर, संयुक्त राज्य अमेरिका, मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात आदि।
क्षेत्रवार वितरण:
- प्रमुख क्षेत्रक: औषधि, जैव प्रौद्योगिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण।
- सनराइज या उभरते क्षेत्रक : इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली अभिकल्प एवं निर्माण, एयरोस्पेस एवं रक्षा, वाहन तथा विद्युत वाहन।
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) क्या है?
- यह विदेशी व्यक्तियों या कंपनियों द्वारा किसी अन्य देश में व्यापारिक हितों में किया गया निवेश है, जिसमें सामान्यतः स्वामित्व या नियंत्रण शामिल होता है।
- वर्तमान में लॉटरी, जुआ एवं सट्टा, चिट फंड, निधि कंपनी, अचल संपत्ति व्यापार तथा तंबाकू से संबंधित कुछ उत्पादों के निर्माण में FDI प्रतिबंधित है।
भारत में FDI के मार्ग
स्वचालित मार्ग:
- इसमें पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होती।
- निवेश के बाद भारतीय रिज़र्व बैंक को सूचना देना आवश्यक होता है।
- अधिकांश क्षेत्र जैसे विनिर्माण और सॉफ्टवेयर इस श्रेणी में आते हैं।
सरकारी स्वीकृति मार्ग:
- इसमें संबंधित मंत्रालय या विभाग से पूर्व स्वीकृति आवश्यक होती है।
- दूरसंचार, मीडिया, औषधि तथा बीमा जैसे क्षेत्र इसमें शामिल हैं।
आगे की राह
- भारत को नीतिगत स्थिरता, पारदर्शिता और निवेशक-अनुकूल नियमों को बनाए रखना चाहिए।
- निवेश सुविधा और विवाद निवारण के संस्थागत तंत्र को मजबूत करने से निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा।
- उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्रों और सतत उद्योगों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने से दीर्घकालिक आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
स्रोत: TH
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